श्रीडूंगरगढ़ टुडे 20 मई 2026
श्री रामायण प्रचार मण्डल उधना सूरत द्वारा आयोजित आशा नगर उधना सूरत में चल रही श्रीमद भागवत कथा में बुधवार 20 मई को चौथे दिन की कथा में कथा वाचक संदीप महाराज ने बताया कि भगवान वामन रूप धारण कर राजा बलि के यहां गए, राजा बलि से तीन चरण भूमि की मांग की।
राजा बलि से संकल्प करवा कर तीन चरण भूमि नापने चले जिसमे एक चरण मे पाताल लोक यानी पृथ्वी लोक, दूसरे चरण में आकाश यानी स्वर्ग लोक नाप लिया फिर भगवान ने कहा तीसरा चरण कहाँ रखूँ तो राजा बलि ने कहा भगवान मेरे सिर पर रख लें। आगे बताया कि देवकी के सात पुत्रों की कंस द्वारा निर्मम हत्या के बाद कारागार मे आठवीं संतान के रुप में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ तो सभी पहरेदार सो गये, कारागार के सारे ताले स्वतः ही खुल गये और वासुदेव जी उन्हें मथुरा से वृंदावन ले जाने के लिए निकल पड़े।

रास्ते मे यमुना नदी को पार करने लगे तो यमुना ने विकराल रुप धारण कर लिया तो वासुदेव जी ने कहा कि मुझे रास्ता दें जिससे मैं वृंदावन जा सकूं तो यमुना महारानी ने कहा मुझे भगवान के चरण स्पर्श कर लेने दो फिर यमुना महारानी ने भगवान के चरण स्पर्श किए और वासुदेव जी को जाने के लिए रास्ता दिया। वासुदेव जी वृंदावन नंदलाल के घर पहुँचे, वहाँ यशोदा मैया के निद्रावस्था मे कन्या का जन्म हुआ और वासुदेव जी ने भगवान कृष्ण को उनके पास सुलाकर उस कन्या को लेकर मथुरा कारागार मे वापस आ गये। सारे ताले फिर से बंद हो गये,

सभी पहरेदार भी जग गये और कंस को सूचित किया तो वो कारागार पहुँचा और उस कन्या को उठाकर जमीन पर पटक कर मारने की कोशिश की मगर वह कन्या हाथ से छटक कर आकाश मे बिजली बनकर कड़की और कहा तेरे को मारने वाले ने जन्म ले लिया है। उधर वृंदावन मे भगवान के जन्म का जोरदार उत्सव मनाया गया और सारा वृंदावन नाचने गाने लगा नन्द घर आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की। जयकारों से पांडाल गुंज उठा । बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण का कृष्ण जन्म का लाभ लिया।


