श्रीडूंगरगढ़ टुडे 22 मई 2026
श्रीडूंगरगढ़ आमजन को ईमित्र के चक्कर न लगाने पड़े और डिजिटल क्रांति के तहत हर जगह सुविधा उपलब्ध हो इसके लिए वसुंधरा राजे सरकार द्वारा प्रत्येक पंचायत मुख्यालय पर एक, एक ईमित्र प्लस मशीन लगाई गई थी, इसके अलावा उपखंड कार्यालय पंचायत समिति, हॉस्पिटल, नगर पालिका कार्यालय, कॉलेज सहित तमाम बड़े स्थान पर इसको लगाया गया था, ताकि संचार क्रांति के युग में आम जन को त्वरित सुविधा उपलब्ध हो सके और मकसद था की जन्म, मृत्यु ,मूल निवास, जाती प्रमाण पत्र सहित किसी भी तरह का प्रिंट निर्धारित शुल्क मशीन में डालकर स्वयं अपना प्रिंट निकाल सके और यह सुविधा प्रत्येक नागरिक को उपलब्ध हो सके और ना ही ई मित्र के बार-बार चक्कर लगाना पड़े।
लेकिन यह संचार क्रांति सफल नहीं हो पाई जानकारी का अभाव या फिर जल्दबाजी में लिया गया फैसला साबित हुआ। इस तरह की मशीन पूरे प्रदेश में लगी सरकार को करोड़ों रुपए का खर्चा हुआ लेकिन आज हालात यह है कि इस मशीन पर कपड़ा लगाकर साफ करने वाला नहीं ।
कैसे काम आती है प्लस मशीन है?
सबसे पहले तो हम आपको यह बताना चाहेंगे कि आपने किसी भी ईमित्र पर जाकर अपना मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाया और उसके कागजात जमा करवा दिए उसके बाद आपको एक टोकन नंबर जारी किया जाता है उसे टोकन नंबर के माध्यम से वापस आपको ही मित्र जाने की जरूरत नहीं जहां पर भी यह ईमित्र प्लस मशीन लगी हुई है वहां आपको जाकर उसे मशीन का प्रयोग करना है।
क्या है ई-मित्र प्लस मशीन?
ई मित्र पल्स मशीन यह एक ऑटोमेटिक एटीएम मशीन तरह है जिसमें टच स्क्रीन पर सभी विभागों के ऑप्शन डाले हुए उदाहरण के तौर पर आपने मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाया था तो टच स्क्रीन पर ऑप्शन लिखे हुए हैं उस पर अपना ऑप्शन सलेक्ट करे यानी मूल निवास प्रिंट सिलेक्ट करना है तो उस पर टच करना होगा उसके बाद उस पर टोकन नंबर मांगे जाएंगे टोकन नंबर जो ईमित्र में अप्लाई के दौरान आपको एसएमएस के माध्यम से जारी हुए थे व नंबर आपको इसमें डालना है।ई मित्र पल्स मशीन यह एक ऑटोमेटिक एटीएम मशीन तरह है जिसमें टच स्क्रीन पर सभी विभागों के ऑप्शन डाले हुए उदाहरण के तौर पर आपने मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाया था तो टच स्क्रीन पर ऑप्शन लिखे हुए हैं उस पर अपना ऑप्शन सलेक्ट करे यानी मूल निवास प्रिंट सिलेक्ट करना है तो उस पर टच करना होगा उसके बाद उस पर टोकन नंबर मांगे जाएंगे टोकन नंबर जो ईमित्र में अप्लाई के दौरान आपको एसएमएस के माध्यम से जारी हुए थे व नंबर आपको इसमें डालना है और टच दबाना दबाना है इसके बाद ऑप्शन आएगा कि आप पेमेंट नगद में भुगतान करेंगे या ऑनलाइन उसको आप सेलेक्ट करें यदि आप नगद भुगतान कर रहे हैं तो सामने ट्रे लगी हुई है उसमें आप 10 डाल दे कुछ ही सैकड़ में आपका मूल निवास प्रिंट होकर बाहर निकल जाएगा यानी निर्धारित शुल्क भुगतान करके प्रिंट निकाला जा सकता है।
अब सवाल यह कि इस मशीन की सार संभाल नहीं होने से व इंटरनेट कनेक्टिविटी सही होने की वजह से पूरी तरह से कबाड़ का रूप ले चुकी है।क्योंकि समय-समय पर इन मशीनों की देखभाल और सुबह इसको स्टार्ट करना और शाम को बंद करना भी जरूरी है इसकी कोई वैकल्पिक व्यवस्था सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा नहीं की गई है और उसी का ही नतीजा है कि यह मशीन सिर्फ शो पीस बनकर रह गई है। खानापूर्ति के तौर पर इन मशीनों का संचालन ईमित्र संचालकों की आईडी से कनेक्ट किया गया था लेकिन उनको भी किसी भी तरह से इसका अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जा रहा था तो उन्होंने भी इसमें कोई खास रुचि नहीं दिखाई और यह मशीन अब अपने अंतिम दौर से गुजर रही है ।
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग सही तरीके से इनका रखरखाव और संचालन का काम रेगुलर करवाये तो यह मशीन आमजन को फायदेमंद भी साबित होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में राज्य सरकार की योजनाएं और उनका प्रचार प्रसार भी इन मशीनों के माध्यम से किया जा सकता है इन मशीनों में बड़ा एलईडी भी लगा हुआ है जिसके माध्यम से राज्य सरकार की योजनाओं का भी प्रचार प्रसार होता है लेकिन रखरखाव न होने की वजह से अब यह मशीन खराब होने के कगार पर है ।
फिलहाल सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 42 मशीन ग्राम पंचायत मुख्यालय पर लगी हुई है एवं 3 मशीन डेलवा, मोमासर, सूडसर में लगी हुई है जबकि शहरी क्षेत्र में 9 मशीन लगी हुई है जिनमें तहसील मुख्यालय, नगरपालिका, कॉलेज, निजी कॉलेज, सीएचसी, मंडी परिसर बीसीएमओ ऑफिस, व भैरव कॉम्प्लेस के परिसर में लगी हुई है। समय रहते किशोर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में यह मशीन पूरी तरह से कबाड़ बन जाएगी।


