श्रीडूंगरगढ़ टुडे 28 मई 2026
श्रीडूंगरगढ़ का उप जिला अस्पताल भले नाम के आगे उप जिला लगा हुआ हो लेकिन डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी की वजह से यहां व्यवस्थाएं सुधरने की बजाय बिगड़ती जा रही है । श्रीडूंगरगढ़ में दंत रोग विशेषज्ञ चर्म रोग विशेषज्ञ प्रतिनियुक्ति पर बीकानेर में सेवाएं दे रहे हैं वह भी राजनीतिक अप्रोच की वजह से जबकि उनका मुख्यालय श्रीडूंगरगढ़ है और यहां आने वाले मरीज लगातार परेशान हो रहे हैं।
डॉ कौशल्या रामावत जो लंबे समय से यानी 2 वर्ष से भी ज्यादा समय हो चुका है और डेपुटेशन पर बीकानेर में सेवाएं दे रही हैं। डॉक्टर प्रियंका बिश्नोई जो दंत रोग विशेषज्ञ हैं वह भी 1 वर्ष से भी ज्यादा समय से बीकानेर में डेपुटेशन पर हैं।श्रीडूंगरगढ़ में जिन मरीजों को दांतों की बीमारी है या चरम रोग या एलर्जी उनको निजी अस्पतालों में चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। रसूखदार डॉक्टरों से लेकर संविदा कर्मियों ने भी राजनीतिक सहारा लेकर अपना डेपुटेशन बीकानेर करवा लिया है लेकिन उन मरीजों का क्या होगा जिनको श्रीडूंगरगढ़ में इलाज की जरूरत है ।
इसके अलावा कुलदीप राठौड़ जो फार्मासिस्ट हैं वो एक वर्ष से डेपुटेशन पर कहीं अन्य कार्यरत हैं, गौरव कौशिक जो लैब टेक्नीशियन है वह भी लंबे समय से डेपुटेशन पर कहीं अन्य कार्यरत हैं। इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ नरेंद्र जो पिछले 6 महीने से बीकानेर जिले से बाहर चुरू जिले में कहीं डेपुटेशन पर कार्यरत है।
सबसे बड़ी खबर यह है संविदा पर कार्यरत लक्ष्मी नाम की एक महिला कर्मचारी जो संविदा कर्मचारी है उसने भी राजनीतिक एप्रोच लगाकर अपना डेपुटेशन बीकानेर में करवा लिया है।
मतलब साफ है श्रीडूंगरगढ़ उप जिला अस्पताल में कोई नौकरी नहीं करना चाहता और सभी अपने-अपने हिसाब से राजनीतिक दांव पेंच लगाकर बीकानेर या अपने गांव के पास ही नौकरी करना चाहते हैं इससे तो अच्छा अपना ट्रांसफर करवा ले तो कम से कम यहां पद तो खाली दिखाई देंगे।
चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारियों से सेटिंग करके अपना डेपुटेशन कहीं पर भी करवा लेते हैं परेशान होती हैं तो उसे क्षेत्र की आम जनता की उनकी सुनने वाला कोई नहीं है आखिर यह डेपुटेशन की राजनीति कब खत्म होगी इसका सवाल किसी के पास नहीं है ।


