श्री डूंगरगढ़ टुडे 8 अगस्त 2025
आज का युवा सामाजिक दवाब का सामना कर रहा है। न केवल युवा अपितु प्रत्येक व्यक्ति सामाजिक आलोचना का शिकार बन रहा है। ये आलोचना बाह्य दबाव समूह के रूप में कार्य कर रही है जिससे व्यक्ति चिंता और तनाव महसूस कर रहा है । जबकि हम आज के समाज की मूल संरचना देके तो समाज आलोचना के वटवृक्ष के रूप में कार्य कर रहा है। गली मोहल्ले नुक्कड़ सभा सभी स्थान आलोचना के केंद्र स्थल बन गए है। कही पर भी सकारात्मक बिंदु या प्रशंसा योग्य विषय पर चर्चा नहीं हो रही है। प्रत्येक स्थान पर व्यक्ति की कमियों और कमजोरियों को केंद्र में रखकर बुराई की जा रही है। समाज अच्छी चीजों को इग्नोर कर रहा है। अच्छी बातों या सकारात्मक चीजों की मार्केटिंग होनी चाहिए़ ताकि दूसरे लोग उनसे सीख सके लेकिन आज का समाज इन सब चीजों को भूल सा गया है। और केंद्र बिंदु रह गई है केवल आलोचना। हमारा दृष्टिकोण बुराई को पकड़ रहा है और उसे चर्चा का विषय बना रहा है। ये वाकई चिंतनीय विषय है । इन सभी से समाज में नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है। समाज में सो अच्छी चीजें हो रही है और एक खराब। लेकिन चर्चा का विषय एक खराब चीज पर केंद्रित है। धीरे धीरे समाज बिल्कुल नकारात्मक होता जा रहा है। ये नकारात्मकता मनुष्य तनाव दे रही है। लोग अंदर से कमजोर होते जा रहे है। अगर कुछ अच्छा हो रहा है तो हम उसे हमारी चर्चा का विषय बनाए ताकि अच्छाई की मार्केटिंग हो यदि कोई बुरा कार्य कर रहा है तो उसके मुंह पर उसको बताए ताकि उसे अपनी गलती का अहसास हो दूसरों के सामने या गली मोहल्ले की नुक्कड़ सभा में उस पर चर्चा करना बुराई की मार्केटिंग करने के बराबर है। ऐसा कार्य समाज में नकारात्मक वातावरण का निर्माण करता है । आज का युवा समाज से दूर हो रहा है उसे लग रहा है कि समाज केवल आलोचना करने की मशीन बन गया है। हम सभी इसी समाज के अभिन्न अंग है।



