श्रीडूंगरगढ़ टुडे 8 मार्च 2026
नारी दिखने में तो है साधारण,
पर उसका व्यक्तित्व है असाधारण
नारी के दिखने में तो हाथ दो है,
पर काम करने से लगता है सौ है।
सतीत्व की रक्षा के लिए अग्नि परीक्षा देती है,
अस्मिता की रक्षा के लिए आत्मदाह (जौहर) कर देती है। कोमलता में रुई सी है नारी,
कठोरता में पत्थर से भी भारी।
नारी एक रूप अनेक
कभी अन्नपूर्णा बन पालन-पोषण करती है,
कभी माँ दुर्गा बन सबकी रक्षा करती है
कभी माँ सरस्वती बन मधुर भाव प्रकट करती है।
कभी लक्ष्मी के रूप में धन बरसाती है।
साधारण होते हुए भी असाधारण है नारी,
नारी एक रूप अनेक
कभी मंच पर बोलती नजर आती है
तो कभी दुनिया रूपी रंगमंच पे ठगी जाती है।
नारी शक्ति का कोई मुकाबला नहीं,
पर उसकी भावना को समझता कोई नहीं।
अपने पर उतर आए तो भीषण आग है,
उसका मन सबके लिए शुद्ध व साफ है।’
एक नारी संस्कृति को बचाती है,
तब ही तो वह साक्षात देवी स्वरूपा कहलाती है।
अनेक नारियाँ ऊँचाइयों को छू रही है,
तो कई आज भी घर से नहीं निकल पा रही है।
खुद को पहचानो नारी’,मर्यादित ढंग से काम करना नियमित रखो जारी ।।



