श्रीडूंगरगढ़ टुडे 13 मार्च 2026
राजस्थानी पारंपरिक त्योहार गणगौर होली के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गणगौर पूजा का पर्व शुरू हो जाता है। इस पर्व में नवविवाहिताएं एवम सुहागन महिलाएं प्रतिदिन गणगौर पूजती हैं और वे चैत्र शुक्ल द्वितीया (सिंजारे) के दिन किसी नदी, तालाब या सरोवर पर जाकर अपनी पूजी हुई गणगौरों को पानी पिलाती हैं और दूसरे दिन सायंकाल के समय उनका विसर्जन कर देती हैं।
उधना स्थित भराड़िया हाउस,आशा नगर-1,उधना में गणगौर बंदोरे का आयोजन शुक्रवार 13 मार्च 2026 को धूमधाम से हुआ।
श्री रामायण प्रचार महिला मण्डल,उधना की पूजा भराडिया ,रितु भराड़िया रेखा भराडिया ने बताया की चैत्र प्रतिपदा से 8 वे दिन शीतला पूजन के दिन से बंदोरे का आयोजन घर घर मे किया जा रहा है प्रतिदिन घुड़ला घुमाया जाता है जिसमे सभी नवविवाहित एवम अन्य सभी महिलाएं पारम्परिक गीतों गाते हुए शामिल होती है!
महिलाएं सुबहं दांतुन देकर गौराजी कौ न्यौता देतै है गैहूँ चना की घुंघरी बना कर भोग लगाते है एवम प्रतिदिन रात्रि घुड़ले को सोसाइटी मै घुमाने ले जाते है रास्ते मै यह गीत गाते है, खिपौली म्हारी खीपां छाई तारा छाई रात भावंजडी म्हारी पुता छाई वीरा के प्रताप या नगरी नारैला छाई राजाजी कै प्रताप बिरमा दत जी रा ईशर दास जी म्हारा घुडला घर पहुंचाये! जैसे अनेकों पारंपरिक गणगौर गीत गाती है।



