श्रीडूंगरगढ़ टुडे 3 मार्च 2026
सोमवार रात शहर से अंचल के गांवों तक हर्षोल्लास के साथ होलिका दहन के आयोजन संपन्न हुए। शाम को महिलाओं युवक-युवतियों एवं वरिष्ठजनों ने होलिका पर गोबर के उपले, गेहूं की बालियाँ, बाजरे के सींटे सहित पूजन सामग्री अर्पित कर होलिका का विधिवत पूजन किया ।मंगल वस्त्रों में विधि विधान से पूजन संपन्न कर महिलाओं ने घर परिवार की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ रात्रि 7: 21 बजे विधिवत होलिका दहन शुरू हुआ लोगों ने भक्त प्रह्लाद के जयकारे लगाए और हर्षोल्लास के साथ होलिका दहन किया गया। सभी जगहों पर उपस्थित लोगों को प्रसाद का वितरण भी किया गया। होलिका दहन के दौरान परम्परा अनुसार कुंवारे युवकों ने होलिका के मध्य रोपे गए लकड़ी के स्तम्भ को अग्नि से निकालकर परम्परा का निर्वहन किया। मान्यता है कि स्तम्भ रूपी प्रह्लाद को अग्नि से सुरक्षित निकालने पर युवक का शीघ्र विवाह होता है। इसी विश्वास के चलते युवकों में खासा उत्साह देखने को मिला। इस दौरान उपस्थित लोगों द्वारा जमकर हूटिंग कर युवाओं का उत्साहवर्धन किया गया।
परम्परा, भक्ति और उत्साह का संगम: दुलचासर होलिका दहन में उमड़ा जनसैलाब
गांव दुलचासर में भी पंडित धर्मेंद्र जाजड़ा एवं सुनील कुमार जाजड़ा ने विधिवत पूजन सम्पन्न करवाया इसके बाद होलिका दहन हुआ इससे पूर्व होलिका पूजन में पहाड़ सिंह पड़िहार,भीकमचंद मुंधड़ा, सोहनलाल महिया, जेठाराम नागल, सुखराम महिया, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। रेवन्त सिंह पड़िहार ने बताया कि गाजण माता मंदिर में ग्रामीणों ने एकत्रित होकर दुलचासर मित्र परिषद के मुख्य प्रांगण में होलिका दहन किया। होलिका दहन के उपरांत ग्रामीणों ने पापड़ का सिकाव किया गोबर से बने उपले, नारियल होलिका दहन के दौरान समर्पित किये और होलिका दहन के पश्चात वापस गांव की ओर लौटते हुए ग्रामीणों ने तेजाजी का गायन भी किया। बड़े बुजुर्गों ने किसान वर्ग ने खेती के बारे में शगुन में बताए इसके बाद ग्रामीणों ने चंग बजाकर नृत्य किया और ग्रामीणों ने अनेकों स्वाग रचाए होली के गीत गा रहे थे।








