श्रीडूंगरगढ़ टुडे 15 मार्च 2026
श्री डूंगरगढ़ कस्बे की देवनारायण कॉलोनी स्थित ओम योग सेवा संस्था के डायरेक्टर राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त योगगुरू ओम कालवा ने बताया अब वो अपनी पूरी ऊर्जा अपनी मायड़ भाषा के लिए लगाएंगे उन्होंने बताया लंबे समय से प्रदेश के सैकड़ों संगठनों ने भरपूर प्रयास किया व कर रहे हैं। योगगुरू ओम कालवा ने बताया कि लाला राजस्थानी जो वाकई में युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है जिन्होने पूर्व में अपनी मायड़ भाषा को मान्यता दिलाने हेतु पांच हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा व विधायकों व सांसदों के मार्फत सरकार को सैकड़ों ज्ञापन भिजवाए लेकिन कार्य हुआ नहीं प्रदेश के तमाम संगठनों का आभार व्यक्त करता हूं और इस काम पुनः नए शिरे से जन आंदोलन बनाते हुए अपील करता हूं कि जिस काम को सालों पहले हो जाना चाहिए था वो अभी तक नहीं हो रहा है।
प्रदेश के आला कमान से भावपूर्ण निवेदन करता हूं अपने बड़े बुजुर्गों का मान सम्मान और स्वाभिमान दिलाना चाहते हो तो जल्द ही इस कार्य को राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराएं, जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील राजस्थान की गौरवशाली संस्कृति, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत की पहचान राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लगातार जोर पकड़ती जा रही है। प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों, साहित्यकारों शिक्षाविदों और भाषा प्रेमियों ने केंद्र सरकार से राजस्थानी भाषा को शीघ्र संवैधानिक मान्यता देने की मांग की है।
भाषा प्रेमियों का कहना है कि राजस्थानी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यह राजस्थान की आत्मा, संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। सदियों से राजस्थानी भाषा में लोकगीत, लोककथाएं, दोहे, कहावतें और समृद्ध साहित्य की अमूल्य धरोहर सुरक्षित है। लाखों लोग आज भी अपने दैनिक जीवन में राजस्थानी भाषा का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद राजस्थानी भाषा को अभी तक भारतीय संविधान में आधिकारिक मान्यता नहीं मिल पाई है, जो राजस्थान की जनता की भावनाओं के साथ न्याय नहीं है। यदि राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाता है तो इससे भाषा का संरक्षण होगा और नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा के अध्ययन का अवसर मिलेगा। साथ ही विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा के अध्ययन और शोध को भी बढ़ावा मिलेगा।
समाज के प्रबुद्ध वर्ग और भाषा प्रेमियों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि राजस्थान की करोड़ों जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए राजस्थानी भाषा को जल्द से जल्द संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि इस समृद्ध भाषा को उसका उचित अधिकार और सम्मान मिल सके।“म्हारी भाषा, म्हारो गौरव – राजस्थानी ने मिले संवैधानिक मान्यता।” भाषा प्रेमी एवं ख्याति प्राप्त योगगुरू ओम कालवा अब लाला राजस्थानी को लेकर इस मुहिम को गति देंगे।




