श्रीडूंगरगढ़ टुडे 14 जून 2026
श्रीडूंगरगढ़ कस्बे में तपस्वी शिरोमणि, जिनशासन गौरव आचार्य भगवंत हंसरत्न सूरीश्वरजी महाराज का सोमवार को श्रीडूंगरगढ़ में मंगल प्रवेश होगा। उनके स्वागत को लेकर जैन समाज में उत्साह का माहौल है।
श्री ओसवाल पंचायत के मीडिया प्रभारी अक्षत पुगलिया ने बताया कि आचार्य हंसरत्न सूरीश्वरजी महाराज ने अपने तपमय जीवन में सात बार 180-180 उपवास की कठिन आराधना कर विशिष्ट कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके अलावा एक माह से अधिक अवधि के 117 से अधिक उपवास कर उन्होंने जैन तप परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उनका जीवन संयम, त्याग, तप, करुणा और जिनवाणी के प्रचार-प्रसार को समर्पित रहा है।
रविवार को बिग्गा में आयोजित धर्मसभा में आचार्य ने अपने प्रवचन में कहा कि सच्चा सुख त्याग में है, संग्रह में नहीं। क्रोध, मान, माया और लोभ आत्मा के सबसे बड़े शत्रु हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा तीर्थ है तथा जीवदया ही परम धर्म है। आचार्य ने युवाओं को संस्कार, सेवा और साधना का मार्ग अपनाने तथा प्रतिदिन नवकार मंत्र के जाप का संदेश दिया।
आचार्य ने अपने आशीर्वचनों में श्रीडूंगरगढ़ सहित क्षेत्र की सुख-समृद्धि की मंगलकामना करते हुए कहा कि धर्म की गंगा निरंतर प्रवाहित होती रहे तथा प्रत्येक परिवार में शांति, सद्भाव और संस्कारों का वास हो।
जैन मंदिर जीर्णोद्वार से जुड़े अशोक बैद ने बताया कि आचार्य का मंगल प्रवेश सोमवार 15 जून को प्रातः 7 बजे श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर (श्री ओसवाल पंचायत) में होगा। वहीं सायं लगभग 5 बजे उनका मंगल विहार लखासर के लिए होगा। समाज के लोगों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर दर्शन-वंदन एवं प्रवचन का लाभ लेने की अपील की गई है।




