श्रीडूंगरगढ़ टुडे 26 जून 2026
श्री डूंगरगढ़ (बीकानेर)। विश्व इतिहास के महान ज्ञानी, दार्शनिक एवं चिकित्सक हकीम लुकमान (लुकमान अल-हकीम) अपनी अद्भुत बुद्धिमत्ता, नैतिक शिक्षाओं तथा चिकित्सा ज्ञान के लिए आज भी पूरे विश्व में सम्मान के साथ याद किए जाते हैं। पवित्र कुरान की 31वीं सूरह “सूरह लुकमान” उनके नाम से संबोधित है, जिसमें उनके द्वारा अपने पुत्र को दिए गए जीवनोपयोगी उपदेशों का उल्लेख मिलता है।
श्री डूंगरगढ़ जुम्मा मस्जिद के ख़ंजाची हाजी फ़ारूख ने कहा कि हकीम लुकमान की शिक्षाएं मानवता, नैतिकता, संयम, ईश्वर भक्ति और सदाचार का संदेश देती हैं। वर्तमान समय में युवाओं और समाज को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ के प्रदेश संरक्षक योगगुरू ओम कालवा ने कहा कि हकीम लुकमान को प्राकृतिक चिकित्सा, जड़ी-बूटियों के ज्ञान और स्वास्थ्य संबंधी हिकमत का अद्वितीय ज्ञान प्राप्त था। उनकी शिक्षाएं स्वस्थ एवं नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को हकीम लुकमान के जीवन दर्शन और संदेशों को आमजन तक पहुंचाने के लिए संगठित प्रयास करने चाहिए।
हाजी फ़ारूख एवं योगगुरू ओम कालवा ने संयुक्त रूप से आह्वान किया कि हकीम लुकमान की शिक्षाओं पर आधारित जन-जागरण अभियान चलाकर युवाओं और समाज को नैतिक मूल्यों, सदाचार, स्वास्थ्य एवं मानव सेवा के प्रति जागरूक किया जाए, जिससे एक स्वस्थ, जागरूक एवं संस्कारित समाज का निर्माण हो सके।





