श्रीडूंगरगढ़ टुडे 29 जून 2026
क्षेत्र के गांव मोमासर में गांव रक्षक माने जाने वाले भोमिया दादा का वार्षिक धार्मिक उत्सव हर्षोल्लास के साथ सोमवार सुबह आरती के साथ आयोजन संपन्न हुआ।

रविवार शाम को श्री भोमिया दादा सेवा समिति मोमासर के तत्वाधान में समस्त मोमासर वासियों द्वारा वार्षिक कड़ाही प्रसाद व भव्य जागरण का आयोजन किया गया मंदिर को फुलों व रंग बिरंगी रोशनियों से सुंदर सजावट से सजाया गया। भोमिया दादा का दिव्य श्रृंगार किया गया।

मन्दिर परिसर में सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीणों का तांता लगा रहा सभी ने दादा के धोक लगाकर गांव में सुख समृद्धि की प्रार्थनाएं की। इसके बाद 231 किलो लापसी का दादा को भोग लगाया गया। हर घर से लोगों ने दादा का प्रसाद लिया

रविवार शाम को मंदिर प्रांगण में भव्य जागरण का आयोजन किया गया। जागरण में भजन कलाकार काशीराम व बाल कलाकार कंचन ने बाबा की स्तुति का गान किया। श्रीभोमिया दादा सेवा समिति मोमासर के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भागीदारी निभाई।
बुजुर्ग बताते है कहानी…

गांव के बुजुर्ग बताते हैं, कि 700 वर्ष से अधिक समय से ये परंपरा निभाई जा रही है। बुजुर्गों ने बताया कि गांव के स्थान पर पहले सुनसान जगह थी, यहां भेड़, बकरी व पशु चराने के लिए दूर दूर से लोग आते थे। उस समय यहां दो भाई भी आते थे, यहां एक भूत रहता था और छोटा भाई जब गाए चराने आता था तो उसकी मां का दिया चूरमा भूत खा लेता था। एक दिन उसके बड़े भाई मूमलजी ने अपने भाई से पूछा कि तु कमजोर क्यों हो रहा है? खाना नहीं खाता क्या? तो छोटे ने पूरी बात बताई। इस पर मूमलजी इस स्थान पर आए और भूत को ललकारा। मूमलजी ने भूत की चोटी पकड़कर उससे पानी कहां के बारे में पूछा। भूत ने एक पत्थर की सीला के नीचे पानी होने की बात कही। उन्होंने यहां एक कुआं खोदा जो आज भी भूतों के कुएं के नाम से प्रसिद्ध है। मोमासर के रक्षक भोमिया दादा का गांव बसे करीब 700 वर्ष हो गए है। आज भी भोमिया दादा को सबसे पहले याद किया जाता हैं और इस अवसर पर लापसी का प्रसाद चढ़ावा होता है।







