श्रीडूंगरगढ़ टुडे 4 जुलाई 2026
लगातार हो रही बारिश और जर्जर स्कूल भवनों से जुड़े हादसों के बाद शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा) की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में सभी सरकारी स्कूलों के भवनों का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। सभी जिला अधिकारियों को 7 जुलाई तक ऑडिट रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय और समग्र शिक्षा को भेजनी होगी।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि किसी भी सरकारी स्कूल का भवन यदि जर्जर या असुरक्षित पाया जाता है तो वहां तुरंत कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी। ऐसे स्कूलों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को नजदीकी सुरक्षित सरकारी स्कूल या अन्य सुरक्षित भवन में शिफ्ट किया जाएगा। यदि सुरक्षित स्कूल अधिक दूरी पर है तो विद्यार्थियों के आवागमन के लिए परिवहन सुविधा या ट्रांसपोर्ट वाउचर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। जरूरत पड़ने पर स्कूलों का संचालन दो पालियों में भी किया जा सकेगा।
खुले मैदान, टीन शेड और पेड़ के नीचे पढ़ाई नहीं
शिक्षा विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में विद्यार्थियों को खुले मैदान, टीन शेड, छप्पर या पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाई नहीं कराई जाएगी। यदि किसी स्कूल को वैकल्पिक भवन में स्थानांतरित किया जाता है तो वहां पहले सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। भवन सुरक्षित मिलने के बाद ही कक्षाएं शुरू होंगी।
जर्जर भवनों पर लगेगा लाल निशान
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जर्जर भवनों की तुरंत बैरिकेडिंग कर उन पर लाल निशान लगाया जाए, ताकि वहां कोई प्रवेश न कर सके। इसकी फोटो भी रिकॉर्ड के लिए सुरक्षित रखी जाएगी। हाल ही में जिन स्कूलों में भवन गिरने की घटनाएं हुई हैं, वहां समग्र शिक्षा के अधिकारी मौके पर जाकर जांच करेंगे और रिपोर्ट तैयार करेंगे।
रोज होगी भवन की जांच
मानसून के दौरान सभी स्कूलों में छत, नालियों और जल निकासी व्यवस्था की नियमित सफाई कराई जाएगी। स्कूल भवन का प्रतिदिन निरीक्षण होगा। यदि कहीं छत टपकने, दीवार में दरार या भवन कमजोर होने की आशंका मिलती है तो उस हिस्से को तत्काल प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। भवन पूरी तरह सुरक्षित होने तक वहां किसी भी विद्यार्थी या कर्मचारी को बैठने की अनुमति नहीं होगी।
संस्था प्रधान की होगी जिम्मेदारी
हर दिन स्कूल खुलने से पहले संस्था प्रधान भवन, कक्षाओं, बरामदों और शौचालयों का निरीक्षण करेंगे। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही विद्यार्थियों को स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। भारी बारिश या जलभराव की स्थिति में स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर अवकाश भी घोषित किया जा सकेगा।





