श्रीडूंगरगढ़ टुडे 27 जुलाई 2026
धीरदेसर पुरोहितान गांव में उस समय शोक की लहर दौड़ गई जब अपनी सादगी और जीव सेवा के लिए पहचाने जाने वाले मूलाराम नाई का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे ग्रामीण इलाके में गहरा दुख व्याप्त है।
योगगुरु ओम कालवा ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मूलाराम जी सदैव मूक पशु-पक्षियों की सेवा और समाज कल्याण के कार्यों में अग्रणी रहते थे। अपना संपूर्ण जीवन बेजुबान जीवों की सेवा को समर्पित कर दिया। उनका जाना समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
योग गुरू ने बताया कि मूलाराम वर्षों से प्रतिदिन प्रातःकाल अपने घर से दाना-पानी लेकर निकलते थे तथा गाँव की गली-मोहल्लों से अनाज एकत्र कर गायों, कुत्तों और अन्य बेजुबान जीवों को प्रेमपूर्वक भोजन कराते थे। उनकी स्नेहभरी आवाज सुनते ही गाँव की गायों और कुत्तों का झुंड उनके पास आ जाता था और वे सभी को अपने हाथों से रोटियाँ खिलाते थे।इतना ही नहीं, वे छोटे-छोटे बच्चों को टॉफियाँ और मखाने देकर उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरते थे। इसके पश्चात गाँव के विभिन्न स्थानों पर स्थित कीड़ी-नगरों में सूखा आटा डालकर सूक्ष्म जीवों की भी सेवा करते थे।
उनका यह सेवा कार्य वर्षों तक बिना किसी स्वार्थ और बिना किसी प्रचार-प्रसार के निरंतर चलता रहा। योगगुरु ओम कालवा ने कहा कि स्वर्गीय मुलाराम नाई का जीवन हमें यह संदेश देता है कि मानवता की सबसे बड़ी पहचान जीवों के प्रति दया, करुणा और सेवा है। उनका त्याग, सेवा और जीव प्रेम आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।अंत में उन्होंने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।



