श्रीडूंगरगढ टुडे 15 अगस्त 2026
14 अगस्त की आधी रात को जहां देश ने स्वतंत्रता का जश्न मनाया, वहीं क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर की मांग को लेकर चक्काजाम का आह्वान करने वाले स्थानीय कांग्रेस नेताओं और युवाओं की रिहाई भी उसी आधी रात को संभव हो सकी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा के सीधे हस्तक्षेप के बाद पुलिस प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा और हिरासत में लिए गए सभी 31 युवाओं तथा कांग्रेस नेताओं को देर रात रिहा कर दिया गया।
थाने से छूटते ही कार्यकर्ताओं ने अपने नेता हरिराम बाना को कंधों पर उठा लिया और मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में ट्रॉमा सेंटर के लिए की गई 25 करोड़ की घोषणा को अपने आंदोलन की जीत बताते हुए जमकर जश्न मनाया।
दिनभर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
घटनाक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे से हुई, जब पुलिस ने एहतियातन कांग्रेस नेता हरिराम बाना और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिनिधि राधेश्याम सिद्ध को उनके आवास से डिटेन (हिरासत में) कर लिया। इसके बाद दिनभर तनाव का माहौल रहा:
पुलिस ने हरिराम बाना के कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया।
वहां जुटने वाले युवा कार्यकर्ताओं को लगातार पुलिस द्वारा डिटेन किया जाता रहा।
युवाओं की गाड़ियों तक को क्रेन की मदद से थाने पहुंचा दिया गया।
पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया और आक्रोशित युवाओं ने शनिवार सुबह थाने के घेराव का अल्टीमेटम दे दिया।
डोटासरा का फोन, सोशल मीडिया पर घेराबंदी और आधी रात रिहाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए देर रात राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा ने खुद मोर्चा संभालाः
- डोटासरा ने राजस्थान कांग्रेस और अपने व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए राज्य सरकार पर करारा हमला बोला।
- उन्होंने बीकानेर जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा से फोन पर सीधी बातचीत कर विरोध दर्ज कराया।
डोटासरा के सक्रिय होते ही पुलिस प्रशासन को अपना रुख बदलना पड़ा। शांति भंग के आरोप में पकड़े गए सभी 31 युवाओं को तहसीलदार के समक्ष पेश कर तुरंत जमानत दिलाई गई। इसके बाद घर से उठाए गए नेता हरिराम बाना और राधेश्याम सिद्ध को भी थाने से बाइज्जत रिहा कर दिया गया।
स्थानीय राजनीति में चर्चाएं तेज
कार्यकर्ताओं में नया जोशः पीसीसी चीफ की इस त्वरित सक्रियता से स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। राधेश्याम सिद्ध ने डोटासरा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “यदि प्रदेशाध्यक्ष समय पर हस्तक्षेप नहीं करते, तो क्षेत्र के युवाओं और नेताओं को स्वतंत्रता दिवस का ऐतिहासिक दिन थाने की सलाखों के पीछे बिताना पड़ता।”
स्थानीय नेताओं की चुप्पी पर सवालः इतने बड़े घटनाक्रम के बाद भी क्षेत्र के अन्य बड़े स्थानीय कांग्रेस नेताओं की ओर से पूरे मामले पर कोई प्रतिक्रिया या निंदा तक न आना भी आमजन और कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।










