श्रीडूंगरगढ टुडे 30 जुलाई 2026
राजस्थान के सुप्रसिद्ध पूनरासर धाम स्थित श्री हनुमानजी महाराज के लगभग 308 वर्ष प्राचीन मंदिर के इतिहास में मंगलवार को एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। मंदिर की स्थापना के बाद पहली बार स्वयं किसी पुजारी ने दंडवत यात्रा कर श्री पूनरासर बाबा के दर्शन किए और आस्था, समर्पण तथा सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। मंदिर की पुजारी सेवा का दायित्व बोथरा ओसवाल परिवार के पास है। वर्तमान में नथमलजी सोहनलालजी बोथरा परिवार की पुजारी बारी चल रही है। इसी परिवार के युवा सदस्य नीरज बोथरा, पुत्र श्री छतरसिंह बोथरा, ने लगभग दो किलोमीटर लंबी दंडवत यात्रा पूर्ण कर श्री पूनरासर बाबा के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किए। वर्षों
से हजारों श्रद्धालु दंडवत यात्रा कर अपनी मनोकामनाएं लेकर बाबा के दरबार पहुंचते रहे हैं, लेकिन मंदिर के 308 वर्षों के इतिहास में किसी पुजारी द्वारा दंडवत यात्रा करने का यह पहला अवसर है।
यात्रा पूर्ण होने के बाद नीरज ने प्रातःकाल श्री पूनरासर बाबा एवं श्रीराम दरबार का मनोहारी श्रृंगार किया तथा गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बाबा की प्रथम ज्योत प्रज्वलित कर आरती का सौभाग्य प्राप्त किया। इस
दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ और जय श्री पूनरासर बाबा के गगनभेदी जयघोष से भक्तिमय वातावरण में डूब गया। पिछले लगभग तीन महीनों से अपनी पुजारी बारी के दौरान नीरज पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ बाबा की सेवा पूजा में निरंतर जुटे हुए हैं। उनके लिए सेवा ही सबसे बड़ा सौभाग्य है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे अथवा प्रसाद के प्रति भी उनके मन में कोई आकर्षण नहीं, बल्कि वे निष्काम भाव से सेवा
को ही अपना जीवन-धर्म मानते हैं। इस पुण्य यात्रा में मनीष स्वामी ने सहभागी बनकर उनका उत्साहवर्धन किया। पुजारी परिवार की महिलाओं-हेमा, मोनिका और अल्पा-तथा बालिकाओं मैत्री, उर्वी और हीर ने भी पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ यात्रा में सहभागिता निभाई। वहीं पुजारी सिद्धार्थ, पंकज, अमित जिनेंद्र और मुकेश संपूर्ण यात्रा के दौरान नीरज के साथ रहे तथा निरंतर उनका उत्साह बढ़ाते रहे। नीरज की यह साधना केवल व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सच्ची भक्ति पद या परंपरा से नहीं, बल्कि विनम्रता, निष्काम सेवा और पूर्ण समर्पण से सिद्ध होती है। पूनरासर धाम के इतिहास में दर्ज हुई यह घटना श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय तक प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।



