श्रीडूंगरगढ़ टुडे 6 अगस्त 2026
क्षेत्र के गांव मोमासर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा का यह संगीतमय प्रसंग धर्म, भक्ति और नैतिक मूल्यों का एक अद्भुत संगम बना हुआ है। 3 अगस्त से शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन 12 अगस्त तक चलेगा। कथा वाचन पारीक रामकृष्ण शास्त्री एंव कांगड़ क्षेत्र की भजन व संगीत मंडली कथा को अपने मधुर भजनों और वाद्य यंत्रों से संगीतमय बनाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर रही है।

गुरुवार को कथा के दौरान शास्त्री जी ने संध्या एवं कामदेव के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कामवासना का प्रभाव इतना तीव्र होता है कि इसने स्वयं सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी को भी मोहित कर दिया था। सांसारिक वासना और आसक्ति व्यक्ति को बड़े से बड़े और अच्छे से अच्छे सत्कर्म के मार्ग से डिगाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने मन की चंचलता और मानसिकता को पहचानना चाहिए। ब्रह्मा जी द्वारा दिए गए उपदेशों व भाष्य को आज के जीवन में उतारकर खुद को वासना और गलत भटकाव से बचाना चाहिए।और आज के परिवेश में आत्म-नियंत्रण व संयम का पालन करना चाहिए।

कथा के दौरान देवी संध्या द्वारा की गई कठिन तपस्या और उनके अंतिम उपदेश का उल्लेख करते हुए बताया कि मनुष्य को दैनिक जीवन में त्रिकाल संध्या (प्रातःकाल, मध्याह्न और सायं काल) का ध्यान/पूजा अवश्य करनी चाहिए। यदि तीनों समय संभव न हो, तो कम से कम दिन में दो बार (प्रातः और सायं) प्रभु सुमिरन व संध्या-वंदन अवश्य करना चाहिए।

शिव मंदिर के पुजारी मंगलनाथ ने बताया कि कथा प्रारंभ होने से पूर्व ठाकुरजी के मंदिर से शिव पुराण ग्रंथ को श्रद्धापूर्वक मस्तक पर धारण कर तुलसाराम शर्मा एवं किशनाराम गोदारा ने डीजे और कलश यात्रा के साथ शिव मंदिर तक पहुंचाया।
डीजे, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक जयकारों के साथ निकली कलश यात्रा ठाकुर जी के मंदिर से शुरू होकर मुख्य मार्गों से होती हुई शिव मंदिर पहुँची। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
यह आयोजन समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। प्रतिदिन मोमासर सहित कितासर एवं आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।




