श्रीडूंगरगढ टुडे 14 सितंबर 2026
श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका चुनाव-2026 के नतीजों ने शहर के राजनीतिक गणित को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। पारंपरिक दलों के दबदबे के बीच मतदाताओं ने इस बार चौंकाने वाला जनादेश दिया है। कहीं महज 2 वोटों के अंतर से जीत-हार तय हुई, तो कहीं दिग्गज चेहरों को अपने ही वार्डों में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।
विकास मंच का धमाकेदार आगाज, लेकिन संयोजक हारे
चुनाव से ठीक एक महीने पहले गठित हुए विकास मंच ने 9 वार्डों में जीत दर्ज कर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। मंच ने वार्ड नंबर 40 में 384 वोटों के बड़े अंतर से धमाकेदार जीत हासिल की। हालांकि, संगठन स्तर पर इस शानदार प्रदर्शन के बावजूद मंच के संयोजक, चेयरमैन पद के दावेदार और एक अन्य बड़े चेहरे को अपने-अपने वार्ड में हार का सामना करना पड़ा।
RLP का सूपड़ा साफ, CPI(M) की साख बची
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के लिए यह चुनाव बड़ा झटका साबित हुआ। पार्टी ने 8 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन खाता तक नहीं खुल सका। दूसरी ओर, 21 प्रत्याशी मैदान में उतारने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI(M)) की साख वार्ड नंबर 19 ने बचाई, जहां उसके एकमात्र प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।
1-1 वोट पर सिमटे तीन प्रत्याशी, नोटा से भी कम मिला समर्थन
चुनाव नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा तीन प्रत्याशियों को मिले मतों की रही। वार्ड नंबर 9 के निर्दलीय प्रत्याशी, वार्ड 23 के माकपा प्रत्याशी और वार्ड नंबर 29 के कांग्रेस प्रत्याशी को महज 1-1 वोट ही नसीब हुआ। इन तीनों का वोट आंकड़ा नोटा (NOTA) से भी नीचे रहा।
रोचक मुकाबले और चुनावी झलकियां
- वार्ड 31 में सबसे करीबी मुकाबला: भाजपा प्रत्याशी ने बेहद रोमांचक मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी को महज 2 वोटों के अंतर से हराया।
- नेता हारे, पत्नी ने बचाई लाज: वार्ड 15 से हार का सामना करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के परिवार की लाज उनकी पत्नी ने बचाई। उन्होंने वार्ड 14 से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 301 वोटों से पराजित किया।
- भरत सुथार का दबदबा: राज्यमंत्री रामगोपाल सुथार के पुत्र भरत सुथार ने पिछली बार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 298 वोटों की बढ़त के साथ जीत दर्ज की।
चुनावी तस्वीर और नए समीकरण
भाजपा और कांग्रेस के पारंपरिक दंगल के बीच विकास मंच की 9 सीटों पर जीत, RLP की शून्य पर विदाई और निर्दलीय व अन्य प्रत्याशियों के आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि श्रीडूंगरगढ़ की जनता अब नए विकल्पों को भी मौका देने के लिए तैयार है।











